बच्चों का Screen Time: असर और इसे कैसे कंट्रोल करें?

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आजकल पुणे के हर घर में बच्चे स्मार्टफोन, टैबलेट या टीवी पर बहुत समय बिताते हैं। यह एक हकीकत है कि हमारा जीवन डिजिटल हो गया है, और बच्चे भी इसका हिस्सा हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके बच्चे का Kid’s Screen Time कितना होना चाहिए और इसका उन पर क्या असर पड़ रहा है? पुणे के कई माता-पिता इस बात से परेशान हैं कि आखिर वे अपने बच्चे के स्क्रीन टाइम को कैसे control screen time करें। यह सिर्फ बच्चों की खुशी का मामला नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और विकास का भी है।

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एक्सपर्ट ओपिनियन: स्क्रीन टाइम का बच्चों पर असर

पुणे के बाल मनोवैज्ञानिक और पीडियाट्रिशियन (बाल रोग विशेषज्ञ) मानते हैं कि संतुलित स्क्रीन टाइम बच्चों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन ज़्यादा स्क्रीन टाइम के गंभीर नुकसान भी होते हैं। पुणे की बाल मनोवैज्ञानिक, डॉ. सीमा पटेल बताती हैं:

  • आँखों पर असर: लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों की आँखों पर ज़ोर पड़ता है, जिससे आँखों में सूखापन, जलन या नंबर आने की समस्या हो सकती है।
  • नींद में कमी: रात को सोने से पहले स्क्रीन देखने से बच्चों को नींद आने में दिक्कत होती है।
  • शारीरिक गतिविधियाँ कम होना: जब बच्चे स्क्रीन पर होते हैं, तो वे बाहर खेलने या शारीरिक गतिविधियाँ करने से चूक जाते हैं।
  • सोशल स्किल्स पर असर: कम उम्र से ही ज़्यादा Kid’s Screen Time बच्चों के सामाजिक कौशल को प्रभावित कर सकता है।

पुणे के पेरेंट्स की चिंताएं और सुझाव: Control Screen Time कैसे करें?

हमने पुणे के विभिन्न इलाकों, जैसे कोथरुड, हिंजवड़ी, खराडी, औंध और पिंपरी-चिंचवड़, के कुछ पेरेंट्स से बात की, जो अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर चिंतित हैं और इसे control screen time करने के तरीके ढूंढ रहे हैं:

  • कोथरुड से पूजा (दो बच्चों की माँ): “मेरे दोनों बच्चे (7 और 10 साल) ऑनलाइन पढ़ाई के बाद भी गेम खेलते रहते हैं। मैं तो बस यही सोचती हूँ कि कैसे उनके Kid’s Screen Time को कम करूँ। मना करने पर झगड़ा करते हैं और कहते हैं कि सब दोस्त खेलते हैं।”
  • हिंजवड़ी से सुरेश (एक बेटे के पिता): “मैं अपने बेटे (8 साल) को फोन देता ही नहीं, लेकिन जब वह सोसायटी में दोस्तों के साथ होता है, तो सब गेम खेलते हैं। मुझे लगता है कि मैं अकेला अपने बेटे के स्क्रीन टाइम को control screen time नहीं कर सकता, जब बाकि सब कर रहे हों।”
  • खराडी से मीरा (एक बेटी की माँ): “मैंने अपनी बेटी (6 साल) के लिए एक सख्त टाइमर सेट कर दिया है। 1 घंटा स्क्रीन, फिर 1 घंटा बाहर खेलो या किताबें पढ़ो। शुरुआत में बहुत मुश्किल हुई, लेकिन अब उसे और हमें भी आदत बन गई है।”
  • औंध से नेहा (एक टीनएजर की माँ): “मेरी बेटी (14 साल) तो सोशल मीडिया पर इतनी एक्टिव रहती है कि खाना खाते समय भी फोन नहीं छोड़ती। मैं बहुत कोशिश करती हूँ, पर आजकल के बच्चे सुनते ही कहाँ हैं! उसके Kid’s Screen Time को मैनेज करना एक चुनौती बन गया है।”
  • पिंपरी-चिंचवड़ से राजेश (दो बच्चों के पिता): “हमारे घर में टीवी ही नहीं है, लेकिन बच्चों ने टैबलेट और स्मार्टफोन पर अपना रास्ता ढूंढ लिया है। खासकर वीकेंड पर तो सुबह से शाम तक लगे रहते हैं। हमें लगता है कि हमें ही कुछ नए नियम बनाने पड़ेंगे ताकि उनका स्क्रीन टाइम control screen time हो सके।”
  • शिवाजीनगर से राहुल (एक बेटे के पिता): “मेरा बेटा (12 साल) तो रात को भी छुपकर फोन चलाता रहता है। उसकी नींद पूरी नहीं होती और सुबह स्कूल जाने में नाटक करता है। मुझे चिंता है कि यह उसकी सेहत पर गलत असर डाल रहा है।”

स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करने के प्रैक्टिकल तरीके

यहां कुछ ऐसे असरदार तरीके दिए गए हैं जिनसे आप अपने बच्चे के Kid’s Screen Time को बेहतर ढंग से control screen time कर सकते हैं:

  1. नियम तय करें: घर के सभी सदस्यों के लिए स्क्रीन टाइम के नियम बनाएं। जैसे – खाने के समय कोई स्क्रीन नहीं, सोने से एक घंटा पहले कोई स्क्रीन नहीं।
  2. उम्र के हिसाब से लिमिट:
    • 2 साल से कम: स्क्रीन टाइम बिलकुल नहीं (वीडियो कॉल को छोड़कर)।
    • 2-5 साल: दिन में 1 घंटा तक, वो भी पेरेंट की देखरेख में।
    • 6 साल से ऊपर: स्कूल वर्क के अलावा, मनोरंजन के लिए 1-2 घंटे का लिमिट।
  3. विकल्प दें: बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने के लिए उन्हें दूसरे मजेदार विकल्प दें – जैसे किताबें पढ़ना, बोर्ड गेम खेलना, बाहर खेलने जाना, पेंटिंग करना।
  4. खुद उदाहरण बनें: बच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं। अगर आप खुद हमेशा फोन पर रहेंगे, तो बच्चे भी वही करेंगे। खुद भी अपने स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करें।
  5. डिजिटल डिटॉक्स डे: हफ्ते में एक दिन ‘नो स्क्रीन डे’ रख सकते हैं। यह पूरे परिवार के लिए हो सकता है।
  6. स्क्रीन-फ्री ज़ोन: घर में कुछ ऐसे एरिया बनाएं जहाँ स्क्रीन बिल्कुल अलाउड न हो – जैसे बेडरूम या डाइनिंग टेबल।
  7. एजुकेशनल कंटेंट चुनें: अगर बच्चे स्क्रीन पर समय बिता रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वे कुछ सीखने वाला या क्रिएटिव कंटेंट देख रहे हैं।
  8. बातचीत ज़रूरी: बच्चों से बात करें कि ज़्यादा स्क्रीन टाइम क्यों अच्छा नहीं है और क्यों आप इसे control screen time करना चाहते हैं।

हमारी पुणे न्यूज़ हब की राय:

Kid’s Screen Time आज के समय की एक बड़ी चुनौती है। इसे पूरी तरह से रोकना शायद मुमकिन न हो, लेकिन सही नियमों और पेरेंट्स की सक्रिय भागीदारी से इसे बेहतर ढंग से control screen time किया जा सकता है। यह बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बहुत ज़रूरी है।

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