Pune Schools And Online Classes Challenges: How Parents Juggle It All

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पुणे शहर में इन दिनों एक नई ‘जुगलबंदी’ देखने को मिल रही है – बच्चों के स्कूल और उनकी online classes challenges! 🏫 कुछ स्कूल पूरी तरह खुल गए हैं, तो कुछ हाइब्रिड मॉडल पर चल रहे हैं, जहाँ बच्चे कभी घर से पढ़ते हैं तो कभी स्कूल जाते हैं। इस बदली हुई व्यवस्था ने पुणे के माता-पिता की ज़िंदगी में कई बदलाव ला दिए हैं। यह सिर्फ बच्चों के लिए नहीं, बल्कि उनके पेरेंट्स के लिए भी एक बड़ा एडजस्टमेंट है।

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एक्सपर्ट ओपिनियन: यह नया नॉर्मल क्या कहता है?

शिक्षा विशेषज्ञ और बाल मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि महामारी के बाद से शिक्षा का तरीका काफी बदल गया है। बच्चे अब केवल किताबों से नहीं, बल्कि स्क्रीन से भी सीख रहे हैं। पुणे की शिक्षाविद्, डॉ. मीनाक्षी शर्मा बताती हैं, “यह बदलाव जरूरी था, लेकिन इसने परिवारों पर एक नया दबाव डाल दिया है। माता-पिता को अब न सिर्फ घर संभालना है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई में भी पहले से ज्यादा एक्टिव रहना पड़ रहा है।”

पुणे के माता-पिता की कहानी: Online Classes Challenges का सामना

आइए सुनते हैं पुणे के कुछ पेरेंट्स की ज़ुबानी कि वे कैसे इस दोहरी जिम्मेदारी को निभा रहे हैं:

  • वर्किंग पेरेंट्स की दिक्कतें: अंजलि (Aarti), एक IT कंपनी में काम करती हैं और उनके दो बच्चे हैं जो अभी भी हाइब्रिड क्लास अटेंड करते हैं। वह बताती हैं, “सुबह बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करो, फिर उनकी ऑनलाइन क्लास के लिए लैपटॉप सेट करो, और फिर अपनी ऑफिस मीटिंग्स! कई बार तो लगता है कि जैसे मेरा पूरा दिन सिर्फ ‘मैनेजिंग लॉजिस्टिक्स’ में ही चला जाता है। Pune Schools ने खुलने का फैसला तो ले लिया है, लेकिन घर से काम कर रहे पेरेंट्स के लिए यह बहुत मुश्किल है।”
  • छोटे बच्चों के साथ संघर्ष: प्रीति (Preeti) का 5 साल का बेटा प्री-प्राइमरी में है। उसके लिए ऑनलाइन क्लास में फोकस करना बड़ा मुश्किल होता है। प्रीति कहती हैं, “मुझे उसके बगल में बैठना पड़ता है ताकि वह ध्यान दे। उसका होम स्कूलिंग भी मुझे ही करवाना पड़ता है। यह एक अलग तरह की online classes challenges है जहाँ पेरेंट को टीचर भी बनना पड़ रहा है।”
  • टेक्नोलॉजी और डिवाइस की समस्या: कई परिवारों में सिर्फ एक स्मार्टफोन या लैपटॉप होता है। अगर घर में दो बच्चे हैं और दोनों की क्लास एक साथ है, तो डिवाइस की समस्या आ जाती है। मीना (Meena) ने बताया, “मेरे पास एक ही लैपटॉप है और मेरी और मेरे पति, दोनों की वर्क फ्रॉम होम मीटिंग्स होती हैं। ऐसे में बच्चों की ऑनलाइन क्लास के लिए हमें बहुत एडजस्ट करना पड़ता है। कभी-कभी तो किसी एक को अपनी मीटिंग छोड़नी पड़ती है।”
  • स्क्रीन टाइम का डर: पेरेंट्स को यह भी डर लगता है कि बच्चे ज्यादा स्क्रीन पर रहने से उनकी आँखों पर असर पड़ सकता है। रिया (Ria), जिनकी बेटी 8वीं में है, कहती हैं, “स्कूल खत्म होते ही उसकी ट्यूशन की ऑनलाइन क्लास शुरू हो जाती है। मुझे लगता है कि वह बहुत ज्यादा स्क्रीन देख रही है।”

कैसे संभालें यह सब? कुछ प्रैक्टिकल टिप्स

हमारे एक्सपर्ट्स और अनुभवी माता-पिता ने कुछ सुझाव दिए हैं जिनसे इस स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है:

  1. रूटीन बनाएं: बच्चों के स्कूल और ऑनलाइन क्लास का एक फिक्स रूटीन बनाएं। इससे उन्हें पता रहेगा कि कब क्या करना है।
  2. छोटे ब्रेक्स दें: ऑनलाइन क्लासेज के बीच छोटे-छोटे ब्रेक्स ज़रूर दें ताकि बच्चे फ्रेश महसूस करें।
  3. बातचीत ज़रूरी है: बच्चों से और स्कूल से लगातार बातचीत करते रहें। अगर कोई परेशानी है, तो उसे बताएं।
  4. खुद का ध्यान रखें: माता-पिता को भी अपने लिए समय निकालना चाहिए। यह नई चुनौती आपको थका सकती है, इसलिए अपना ख्याल रखना भी ज़रूरी है।
  5. डिवाइस शेयरिंग का प्लान: अगर एक से ज्यादा बच्चे और कम डिवाइस हैं, तो एक टाइम टेबल बनाएं कि कौन कब कौन सा डिवाइस इस्तेमाल करेगा।
  6. स्कूल से मदद मांगें: कई Pune Schools में पेरेंट्स के लिए सपोर्ट ग्रुप या काउंसलर होते हैं जो इन online classes challenges में मदद कर सकते हैं। उनसे संपर्क करें।

हमारी पुणे न्यूज़ हब की राय:

यह दौर चुनौती भरा है, लेकिन माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। Pune Schools और online classes challenges का यह संगम हमें दिखा रहा है कि भारतीय माता-पिता कितनी मजबूती से हर मुश्किल का सामना करते हैं।

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