Navratri की धूम: Pune की Laxmi Road पर उमड़ी खरीदारों की भीड़, दुकानदारों के चेहरे खिले

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पुणे: Navratri का त्योहार जैसे-जैसे करीब आ रहा है, पुणे शहर का दिल, यानी Laxmi Road, उत्सव के रंगों में सराबोर हो गया है। पारंपरिक कपड़ों से लेकर घर की सजावट और पूजा की सामग्री तक, हर चीज़ खरीदने के लिए हज़ारों की संख्या में लोग Laxmi Road के ऐतिहासिक बाज़ार में पहुँच रहे हैं। यह सिर्फ एक खरीदारी की भीड़ नहीं है, बल्कि यह शहर की उस सांस्कृतिक विरासत और उत्साह का प्रतीक है जो महामारी के बाद अब पूरी तरह से लौट आया है। पुणे न्यूज़ हब ने इस त्योहार की तैयारी और लोगों के उत्साह को समझने के लिए बाज़ार का दौरा किया।

इस समय Laxmi Road पर पैर रखने की जगह मिलना भी मुश्किल है। शाम होते ही सड़कें और गलियां खरीदारों से भर जाती हैं। हवा में त्योहार की एक अलग ही ऊर्जा महसूस की जा सकती है – कहीं मोल-भाव का शोर है, तो कहीं गरबा के गाने बज रहे हैं। हर दुकान रंग-बिरंगे चनिया चोली, चमकीले गहनों, खूबसूरत डांडिया स्टिक्स और मिट्टी के दीयों से सजी हुई है। ऐसा लग रहा है मानो पूरा बाज़ार एक विशाल मेले में तब्दील हो गया है, जो शहर भर के लोगों को अपनी ओर खींच रहा है।

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दुकानदारों ने क्या कहा?

त्योहार का यह मौसम स्थानीय दुकानदारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया है, जो पिछले कुछ समय से व्यापार में मंदी का सामना कर रहे थे। हमने केशव जी से बात की, जो Laxmi Road पर “परिधान वस्त्रालय” नाम से अपनी दुकान पिछले 20 सालों से चला रहे हैं।

केशव जी ने चेहरे पर मुस्कान के साथ पुणे न्यूज़ हub को बताया, “पिछले दो दिनों से बहुत अच्छा काम है, भगवान की कृपा है। असली भीड़ अब आनी शुरू हुई है। इस साल लोग पारंपरिक मिररवर्क वाले घाघरा और हल्के वज़न के सिल्क के कुर्ते बहुत पसंद कर रहे हैं। युवाओं में आजकल थीमबेस्ड गरबा का चलन है, तो वे एक जैसे रंग के कपड़े खरीदने रहे हैं। हमें उम्मीद है कि इस साल व्यापार पिछले साल के मुकाबले 30-40% ज़्यादा होगा।” उन्होंने यह भी बताया कि कैसे डिजिटल पेमेंट ने उनके काम को आसान बना दिया है, जिससे भीड़ को संभालने में मदद मिल रही है।

खरीदारों का अनुभव कैसा रहा?

खरीदारी करने आए लोगों में भी गजब का उत्साह दिखा। यह उनके लिए सिर्फ़ सामान खरीदना नहीं, बल्कि एक पारिवारिक अनुभव है। सदाशिव पेठ की रहने वालीं रितु, जो अपनी माँ और छोटी बहन के साथ खरीदारी कर रही थीं, ने अपना अनुभव साझा किया।

उन्होंने उत्साह से भरकर कहा, “नवरात्रि की शॉपिंग के लिए Laxmi Road आना हमारी सालों की परंपरा है। यहाँ जो माहौल और वैरायटी मिलती है, वो किसी मॉल में नहीं मिल सकती। हाँ, भीड़ बहुत है, पर इसी भीड़ और शोर-शराबे से तो त्योहार का असली मज़ा आता है! हम यहाँ अपनी गरबा नाइट के लिए मैचिंग ड्रेस खरीदने आए हैं। कीमतें थोड़ी बढ़ी हुई लग रही हैं, लेकिन त्योहार के आगे सब ठीक है।” रितु की बातों से यह साफ था कि लोगों के लिए यह खरीदारी एक सांस्कृतिक जुड़ाव का हिस्सा है।

निष्कर्ष

Laxmi Road पर यह भीड़ सिर्फ एक बाज़ार की भीड़ नहीं है; यह पुणे की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। यह दिखाता है कि लोग अब खुलकर खर्च करने और त्योहारों को पूरे दिल से मनाने के लिए तैयार हैं। यह स्थानीय कारीगरों, छोटे दुकानदारों और पूरे सप्लाई चेन के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

यह उत्सव शहर की उस résilience (लचीलापन) को भी दर्शाता है जो हर चुनौती के बाद और भी मजबूती से उभरकर सामने आती है। जैसे-जैसे शहर देवी माँ के स्वागत की तैयारी कर रहा है, उसका सबसे पुराना बाज़ार हमेशा की तरह इस जश्न के दिल की धड़कन बना हुआ है।

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