गरबा हमारे लिए भक्ति है”: पुणे की Navtaal Garba क्लास की अनोखी कहानी

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पुणे: नवरात्रि का त्योहार नजदीक आते ही पुणे शहर डांडिया और गरबा की धुनों पर थिरकने लगा है। हर तरफ डांस क्लासेज़ की धूम है, लेकिन कुछ क्लासेज़ ऐसी भी हैं जहाँ गरबा सिर्फ एक डांस नहीं, बल्कि आध्यात्म और भक्ति से जुड़ने का एक माध्यम है। ऐसी ही एक अनूठी क्लास है ‘नवताल गरबा’। पुणे न्यूज़ हब ने Navtaal Garba के फाउंडर्स और छात्रों से बात करके उनके इस खास सफर को समझने की कोशिश की।

Navtaal Garba: The Founder’s Philosophy

Navtaal Garba पिछले 12 सालों से पुणे में ऑथेंटिक (पारंपरिक) गरबा सिखा रहा है। यह सिर्फ एक मौसमी क्लास नहीं है, बल्कि यहाँ साल भर गरबा की ट्रेनिंग चलती है। क्लास की सबसे अनोखी बात उनकी सोच है। जैसा कि वे कहते हैं, “गरबा तो बस एक माध्यम है, हम भक्ति सिखाते हैं, डांस नहीं।

उनके लिए यह आध्यात्मिक रूप से जुड़ने का एक तरीका है। यही वजह है कि Navtaal के छात्र हर जगह, चाहे वह मॉल का स्टेज हो या पथरीली ज़मीन, हमेशा नंगे पैर ही परफॉर्म करते हैं।

Founders Krunal, Ritika & Mehul (Navtaal Garba) के प्रति अपने गहरे समर्पण को व्यक्त करते हुए कहते हैं, “कुछ लोग ध्यान में मौन पाते हैं। मैं अपनी शांति लय में पाता हूँ। मेरी भक्ति गरबा है, मेरी प्रार्थना ताली है, मेरा अर्पण हर कदम है। गरबा के घेरे में, मैं बार-बार माँ अम्बे से मिलता हूँ।

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पुणे में ‘नवताल’ क्लास के दौरान गरबा की पारंपरिक मुद्रा सिखाते इंस्ट्रक्टर। फोटो: नवताल गरबा)

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‘Navtaal’ को हर साल पुणे के लोगों से शानदार प्रतिक्रिया मिलती है। वे कहते हैं, “हम हर साल आगे बढ़ रहे हैं और उन लोगों से जुड़ रहे हैं जो हमारी तरह सोचते हैं।” उनकी क्लास में 8 साल के बच्चे से लेकर 60 साल तक, हर उम्र के लोग एक साथ गरबा सीखते हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा भीड़ 20 से 40 साल के आयु वर्ग की होती है।

‘Navtaal’ के छात्र, जो गरबा को भक्ति का एक रूप मानते हैं। फोटो: नवताल गरबा)

छात्रों की आवाज़: क्या कहते हैं सीखने वाले? (The Students’ Voice) ‘Navtaal Garba’ से जुड़ने वाले छात्र इसे सिर्फ एक डांस क्लास नहीं, बल्कि एक जीवन बदलने वाला अनुभव मानते हैं।

Sheetal Gangawane, जो पहली बार गरबा सीख रही हैं, कहती हैं, “जिस तरीके और ऊर्जा से यहाँ सिखाया जाता है, वह अविश्वसनीय है। जो कोई भी गरबा सीखना चाहता है, उसे यहाँ ज़रूर आना चाहिए!

एक और छात्रा, Smita Shah, कहती हैं, “जो कोई भी पारंपरिक गरबा सीखना चाहता है, उसके लिए ‘Navtaal’ ही सही जगह है। वे बहुत व्यवस्थित तरीके से सिखाते हैं और आपके बेसिक स्टेप्स को परफेक्ट बनाते हैं।

Vipul, जो पिछले साल क्लास से जुड़े थे, अपने अनुभव को साझा करते हुए कहते हैं, “पिछले साल मैंनेनवतालज्वाइन किया और अब मुझे एहसास हुआ कि यह मेरे जीवन के सबसे अच्छे फैसलों में से एक था। रितिका मैम और क्रुणाल सर बहुत सहयोगी, ऊर्जावान और अविश्वसनीय रूप से प्रतिभाशाली हैं।

‘Navtaal Garba’ पुणे में सिर्फ डांस स्टेप्स नहीं सिखा रहा; यह एक ऐसी कम्युनिटी बना रहा है जो गरबा की आत्मा, यानी भक्ति और परंपरा को जीवित रखे हुए है। जैसा कि वे कहते हैं, “आप भक्ति को दिखाते नहीं हैं, आप उसे महसूस करते हैं, उसका अनुभव करते हैं और उसे साझा करते हैं।” और यही ‘नवताल’ अपनी और अपने समुदाय के लिए कर रहा है।

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