पुणे: महाराष्ट्र राज्य सहकारी अपीलीय अदालत ने पुणे की एक हाउसिंग सोसाइटी के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कोंढवा स्थित ब्रह्मा एमराल्ड काउंटी कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (Kondhwa housing society prayer room) के उस प्रस्ताव को सही ठहराया है, जिसमें रमजान के पवित्र महीने के दौरान सोसाइटी के एरोबिक्स रूम को नमाज के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी।
अपीलीय अदालत ने पुणे की सहकारी अदालत के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी गई थी।
कोंढवा की ब्रह्मा एमराल्ड काउंटी हाउसिंग सोसाइटी, जिसमें कुल 352 सदस्य हैं, ने 19 मार्च, 2023 को एक विशेष जनरल बॉडी मीटिंग में एक प्रस्ताव पास किया था। इस प्रस्ताव के अनुसार, रमजान के महीने में हर दिन दोपहर 3:30 बजे से शाम 7:30 बजे तक एरोबिक्स रूम का इस्तेमाल नमाज पढ़ने के लिए किया जा सकता था।
सोसाइटी के एक सदस्य, मोहम्मद उमर मेमन, इस फैसले के खिलाफ पुणे की सहकारी अदालत में चले गए। उनका तर्क था कि सोसाइटी के सामान्य सुविधाओं का उपयोग किसी अन्य काम के लिए करना, विशेषकर धार्मिक उद्देश्य के लिए, सोसाइटी के उपनियमों (Bylaws) 168 और 169 का उल्लंघन है।
शुरुआती सुनवाई के बाद, सहकारी अदालत ने मेमन की याचिका पर सहमति जताते हुए सोसाइटी के प्रस्ताव पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
Kondhwa Housing Society Prayer Room: अपीलीय अदालत ने क्या कहा?
सोसाइटी ने इस रोक के खिलाफ राज्य सहकारी अपीलीय अदालत में अपील की।
अपीलीय अदालत के सदस्य वी. बी. कुलकर्णी ने 29 अक्टूबर को दिए अपने फैसले में निचली अदालत के आदेश को पलट दिया। उन्होंने कहा कि एक सहकारी समिति में अलग-अलग धर्मों और मानसिकता के लोग रहते हैं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया:
- बहुमत का सम्मान: “जब बहुमत सदस्य कोई निर्णय लेते हैं, तो असहमत सदस्यों को उस नियम का पालन करना होता है, बशर्ते कि यह अन्य सदस्यों के लिए असुविधाजनक न हो और उपनियमों के खिलाफ न हो।”
- उपनियमों का गलत अर्थ नहीं: अदालत ने माना कि निचली अदालत ने सोसाइटी के उपनियमों का गलत अर्थ निकाला था। एरोबिक्स रूम को नमाज के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देना उपनियमों का उल्लंघन नहीं है, क्योंकि यह परिसर को किराए पर देने या लाभ कमाने के उद्देश्य से नहीं किया जा रहा था।
- अस्थायी व्यवस्था: यह फैसला केवल रमजान के महीने के लिए और दिन में केवल चार घंटे (3:30 बजे से 7:30 बजे) के लिए था। इससे एरोबिक्स रूम के मूल उद्देश्य में कोई स्थायी बदलाव नहीं हो रहा था।
अदालत ने यह भी कहा कि इस फैसले से याचिकाकर्ता (मेमन) को कोई पूर्वाग्रह या नुकसान नहीं होगा। इसके साथ ही, अपीलीय अदालत ने सहकारी अदालत को जून 2026 के अंत तक इस मामले के मुख्य विवाद पर सुनवाई कर फैसला देने का निर्देश दिया है।
