Authorities are examining disputed land survey records linked to a development project in Hadapsar, raising questions about document verification and approval procedures.
Survey Records में गड़बड़ी के आरोपों से बढ़ी चिंता, PMC ने मांगा जवाब
पुणे | जून 2026
पुणे के हडपसर इलाके में एक भूमि रिकॉर्ड विवाद ने रियल एस्टेट और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक विकास परियोजना के लिए ज़ोनिंग डिमार्केशन मंजूरी हासिल करने में कथित तौर पर फर्जी सर्वे दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
मामला सामने आने के बाद पुणे महानगरपालिका (PMC) और भूमि अभिलेख विभाग ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह मामला दस्तावेजों की सत्यता और मंजूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
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आखिर मामला क्या है?
विवाद हडपसर के सर्वे नंबर 177 से जुड़ा बताया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, विकास अनुमति के लिए जमा किए गए सर्वे रिकॉर्ड की जांच के दौरान पाया गया कि संबंधित दस्तावेज हडपसर की जमीन से नहीं बल्कि मंजरी गांव की संपत्ति से जुड़े हुए थे।
भूमि अभिलेख विभाग के उप अधीक्षक विकास गोफणे ने बताया कि दस्तावेजों में उल्लेखित सर्वे नंबर संबंधित हडपसर भूमि से मेल नहीं खाता। प्रारंभिक जांच में रिकॉर्ड की प्रामाणिकता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।
फर्जी हस्ताक्षर और सील का भी संदेह
जांच अधिकारियों को आशंका है कि दस्तावेजों की तैयारी में राजस्व विभाग के कथित फर्जी हस्ताक्षर और नकली सील का उपयोग किया गया हो सकता है।
बताया जा रहा है कि यही दस्तावेज बाद में PMC को सौंपे गए और उनके आधार पर ज़ोनिंग डिमार्केशन प्रक्रिया आगे बढ़ी।
हालांकि, जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
PMC ने मांगा स्पष्टीकरण
शिकायत मिलने के बाद PMC के भवन विकास विभाग ने संबंधित डेवलपर से जवाब मांगा है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, डेवलपर को निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, निर्माण अनुमति के लिए आवेदन जुलाई 2025 में किया गया था और उसी दौरान संबंधित सर्वे दस्तावेज भी जमा किए गए थे।
डेवलपर का पक्ष भी महत्वपूर्ण
मामले में नाम सामने आने के बाद Prithvi Proximus परियोजना से जुड़े प्रतिनिधियों ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि परियोजना के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां और NOC समय पर जमा की गई थीं।
कंपनी के प्रतिनिधि अमय काले के अनुसार, विवादित सीमांकन को लेकर उन्होंने स्वयं भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
यानी इस मामले में दोनों पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं और अंतिम स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
क्यों अहम है यह मामला?
पुणे देश के सबसे तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट बाजारों में गिना जाता है। Knight Frank India और JLL जैसी रियल एस्टेट कंसल्टेंसी रिपोर्टों के अनुसार, शहर में प्रीमियम और मध्यम श्रेणी की आवासीय परियोजनाओं में लगातार निवेश बढ़ रहा है।
ऐसे माहौल में यदि भूमि रिकॉर्ड या सर्वे दस्तावेजों को लेकर विवाद सामने आते हैं, तो खरीदारों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और स्वतंत्र सत्यापन प्रक्रिया भविष्य में ऐसे विवादों को कम करने में मदद कर सकती है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर PMC और भूमि अभिलेख विभाग की जांच पर है।
यदि दस्तावेजों में गड़बड़ी साबित होती है, तो मामला केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि मंजूरी प्रक्रिया और भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन पर भी व्यापक चर्चा शुरू हो सकती है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि जांच पूरी होने तक किसी भी पक्ष को दोषी या निर्दोष मानना जल्दबाजी होगी। आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।
Source: Land Records Department Inputs, PMC Officials Statements and Publicly Available Project Records.
