हरियाणा में जल्द दौड़ेगी स्वदेशी Hydrogen Train, डीजल पर निर्भरता घटाने की बड़ी तैयारी
नई दिल्ली | जून 2026
कल्पना कीजिए एक ऐसी ट्रेन की, जो बिना डीजल जलाए पटरियों पर दौड़े और पीछे धुआं नहीं बल्कि केवल पानी छोड़े। जो बात कुछ साल पहले भविष्य की तकनीक लगती थी, वह अब भारत में हकीकत बनने की ओर बढ़ रही है।
भारतीय रेलवे ने देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन संचालित ट्रेन को पायलट रन के लिए मंजूरी दे दी है। यह ट्रेन हरियाणा के जिंद–सोनीपत रेल मार्ग पर परीक्षण के तौर पर चलाई जाएगी। रेलवे और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के लिए इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
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क्या खास है इस हाइड्रोजन ट्रेन में?
नई ट्रेन में 1,200 किलोवाट क्षमता का फ्यूल सेल सिस्टम लगाया गया है। यह प्रणाली हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा करती है, जिससे ट्रेन को ऊर्जा मिलती है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन लगभग 75 किलोमीटर प्रति घंटे की गति हासिल कर सकती है। इसके लिए विशेष हाइड्रोजन भंडारण और रिफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया गया है।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए:
- हाई-टेक गैस लीक डिटेक्टर लगाए गए हैं
- 24×7 डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था है
- बहु-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं
भारत के लिए यह कदम क्यों अहम है?
भारत ने 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को कम करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि भारतीय रेलवे का बड़ा हिस्सा पहले ही विद्युतीकृत हो चुका है, लेकिन कुछ गैर-विद्युतीकृत मार्गों पर अभी भी डीजल इंजनों का उपयोग होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें ऐसे मार्गों के लिए एक संभावित स्वच्छ विकल्प बन सकती हैं।
दुनिया में कहां-कहां चल रही हैं हाइड्रोजन ट्रेनें?
भारत इस दिशा में अकेला नहीं है।
जर्मनी दुनिया की पहली नियमित हाइड्रोजन ट्रेन सेवा शुरू करने वाले देशों में शामिल है। जापान और चीन भी इस तकनीक पर तेजी से काम कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और हाइड्रोजन काउंसिल की रिपोर्टों के अनुसार, आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन आधारित परिवहन में वैश्विक निवेश तेजी से बढ़ने की संभावना है।
क्या चुनौतियां भी हैं?
हर नई तकनीक के साथ कुछ चुनौतियां भी आती हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार:
- ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन अभी महंगा है
- इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की लागत अधिक होती है
- बड़े पैमाने पर संचालन के लिए दीर्घकालिक निवेश जरूरी होगा
यानी यह तकनीक उत्साहजनक जरूर है, लेकिन इसे व्यापक स्तर पर अपनाने में समय लग सकता है।
लोगों और उद्योग की प्रतिक्रिया
रेलवे और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ इस पहल को सकारात्मक कदम मान रहे हैं।
यात्रियों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा भविष्य में अधिक पर्यावरण-अनुकूल और कम प्रदूषण वाला परिवहन हो सकता है। वहीं उद्योग जगत इसे भारत की “मेक इन इंडिया” और हरित ऊर्जा रणनीति से जोड़कर देख रहा है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर जिंद–सोनीपत कॉरिडोर पर होने वाले पायलट संचालन पर है।
यदि परीक्षण सफल रहता है, तो भविष्य में भारत के अन्य गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर भी ऐसी ट्रेनों की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
फिलहाल इतना तय है कि भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन केवल एक नई रेल सेवा नहीं, बल्कि देश के स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन भविष्य की ओर बढ़ाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।
Source: Indian Railways, Ministry of Railways Updates, IEA Reports, Hydrogen Council Research and Public Infrastructure Briefings.
