Dagdusheth Ganpati 2025: पुणे में दिखेगा केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर! जानें क्या है खास

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पुणे – हर वर्ष गणेशोत्सव के आगमन पर, पुणे का विश्व-प्रसिद्ध श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति ट्रस्ट (Dagdusheth Ganpati)  शहर की कल्पना को एक नया आयाम देता है। इस वर्ष अपनी 133वीं स्थापना के उत्सव पर, ट्रस्ट एक ऐसी परिकल्पना को साकार करने जा रहा है जो भक्ति और कला का अभूतपूर्व संगम होगी: केरल के प्रतिष्ठित पद्मनाभस्वामी मंदिर की एक भव्य, जीवंत प्रतिकृति का निर्माण।

इस बार, जब लाखों श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए आएंगे, तो वे केवल एक पंडाल में प्रवेश नहीं करेंगे, बल्कि वे भारत के सबसे रहस्यमयी और वैभवशाली मंदिरों में से एक के प्रांगण में खड़े होने का अनुभव करेंगे। यह महत्वाकांक्षी परियोजना महाराष्ट्र के उत्सवधर्मिता को केरल की दिव्य वास्तुकला से जोड़ने का एक अनूठा आध्यात्मिक सेतु बनेगी।

भगवान गणेश की मंगल मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा 27 अगस्त को सुबह 11:11 बजे के शुभ मुहूर्त पर, चित्रकूट के जगद्गुरु श्री रामानुजाचार्य स्वामी घनश्यामाचार्य महाराज के कर-कमलों द्वारा संपन्न होगी।

पुणे का दगडूशेठ गणपति मंदिर अब थाईलैंड में: फुकेत में बनी भव्य प्रतिकृति | Dagdusheth Temple in Thailand

Dagdusheth Ganpati 2025: स्थापत्य और श्रद्धा का अद्भुत संगम

यह प्रतिकृति अपने आप में एक स्थापत्य का चमत्कार होगी। 120 फीट लंबे और 90 फीट चौड़े क्षेत्र में फैली यह रचना 100 फीट की ऊंचाई तक आकाश को स्पर्श करेगी। इसका मुख्य आकर्षण पाँच-मंजिला गोपुरम (मंदिर का मुख्य द्वार) होगा, जिस पर रामायण और कृष्ण लीला की पौराणिक कथाओं को जीवंत करती जटिल नक्काशी की जाएगी। इन कलाकृतियों में ऋषियों, गजराजों और सिंहों की आकृतियाँ भी शामिल होंगी।

मंदिर के भीतर का दृश्य भी उतना ही भव्य होगा, जहाँ 30 विशाल स्तंभों के सहारे पूरा ढाँचा खड़ा होगा और लगभग 500 देवी-देवताओं और संतों की मूर्तियाँ परिसर को सुशोभित करेंगी।

इस प्रतिकृति का आध्यात्मिक केंद्र गर्भगृह होगा, जहाँ भक्त भगवान पद्मनाभस्वामी (भगवान विष्णु का स्वरूप) की प्रसिद्ध ‘अनंत शयन’ मुद्रा वाली विशाल प्रतिमा के दर्शन कर सकेंगे। तिरुवनंतपुरम के मूल मंदिर की परंपरा का पूर्ण सम्मान करते हुए, भगवान के दर्शन तीन अलग-अलग प्रतीकात्मक द्वारों से ही संभव होंगे:

  • प्रथम द्वार से: भगवान पद्मनाभ का दिव्य मस्तक और समीप स्थित एक शिवलिंग के दर्शन होंगे।
  • द्वितीय द्वार से: पद्मनाभ, श्री देवी और भू देवी की स्वर्ण प्रतिमाओं के दर्शन होंगे।
  • तृतीय द्वार से: भगवान के पवित्र चरण कमलों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होगा।

केवल प्रतिकृति नहीं, एक संपूर्ण सांस्कृतिक अनुभव

दगडूशेठ ट्रस्ट यह सुनिश्चित कर रहा है कि यह केवल एक वास्तुशिल्प की नकल न हो, बल्कि एक संपूर्ण सांस्कृतिक अनुभव हो। पंडाल को केरल के ओणम पर्व से प्रेरित पारंपरिक दीयों और मनमोहक पुष्प-सज्जा से सजाया जाएगा। इस अनुभव को और भी यादगार बनाने के लिए, दस दिवसीय महोत्सव में दक्षिण भारत की शास्त्रीय कलाओं का भी प्रदर्शन होगा, जिसमें कथकली नृत्य और कर्नाटक संगीत की भावपूर्ण प्रस्तुतियाँ शामिल हैं।

भक्तों के लिए व्यापक व्यवस्था

इस भव्य आयोजन के साथ-साथ, ट्रस्ट ने भक्तों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। 28 अगस्त को 31,000 महिलाओं द्वारा सामूहिक अथर्वशीर्ष पाठ का भव्य आयोजन होगा। परिसर की निगरानी के लिए 150 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, मुफ्त चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध रहेंगी, और सभी भक्तों के लिए 50 करोड़ रुपये का एक व्यापक बीमा कवर भी प्रदान किया गया है। जो भक्त व्यक्तिगत रूप से नहीं आ सकते, उनके लिए ऑनलाइन दर्शन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

इस दिव्य परिकल्पना को प्रसिद्ध कला निर्देशक विनायक और सरिता रासकर की टीम साकार कर रही है। यह परियोजना दगडूशेठ हलवाई गणपति ट्रस्ट की उस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाती है, जिसके अंतर्गत वे हर वर्ष भारत के प्रसिद्ध तीर्थस्थलों की प्रतिकृतियां बनाकर पुणे के गणेशोत्सव को एक अविस्मरणीय अनुभव में बदल देते हैं।

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