पुणे के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए तेंदुए का डर एक बड़ी सच्चाई बन गया है। आए दिन होने वाली घटनाओं ने human-leopard conflict Pune की समस्या को और भी गंभीर बना दिया है। लोगों की सुरक्षा और तेंदुओं के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन अब नई तकनीक का सहारा ले रहा है। पुणे जिला प्रशासन और Pune forest department ने मिलकर एक बड़ा कदम उठाया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा।
पिछले कुछ समय से पुणे के शिरूर, जुन्नार और अम्बेगांव जैसे इलाकों में तेंदुए के हमले की घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। इन घटनाओं में कुछ लोगों की जान भी चली गई, जिसके बाद स्थानीय निवासियों में काफी गुस्सा और डर का माहौल है। इसी man-animal conflict को कम करने के लिए, जिला कलेक्टर जितेंद्र डूडी की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में यह फैसला लिया गया कि अब इस समस्या से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होगा।
Pune Leopard Attack: जान बचाने को मजबूर किसान, अब गले में पहन रहे कीलों वाले पट्टे
कैसे काम करेगा नया AI system और drone surveys?
यह नई योजना इंसानों और जानवरों, दोनों की सुरक्षा के लिए बनाई गई है।
- AI System: जिन गांवों में तेंदुए का खतरा सबसे ज़्यादा है, वहां एक खास AI system लगाया जाएगा। यह सिस्टम तेंदुए की हरकत पर नज़र रखेगा। जैसे ही कोई तेंदुआ इंसानी बस्ती के पास आएगा, यह सिस्टम अपने आप एक सायरन बजाकर आसपास के लोगों को अलर्ट कर देगा। इससे लोगों को सावधान होने का समय मिल जाएगा और किसी भी अनहोनी को टाला जा सकेगा।
- Drone Surveys: जंगलों और खेतों में तेंदुओं की सही संख्या और उनके आने-जाने के रास्तों का पता लगाने के लिए drone surveys किए जाएंगे। ये ड्रोन रात में भी काम कर सकेंगे और थर्मल इमेजिंग की मदद से leopard tracking को आसान बनाएंगे। इससे वन विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि तेंदुए किन इलाकों में ज़्यादा सक्रिय हैं, ताकि वहां सुरक्षा के इंतज़ाम और कड़े किए जा सकें।
Human-Leopard Conflict: लोगों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता
इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य wildlife safety के साथ-साथ आम नागरिकों की जान बचाना है। Pune forest department के अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से उन्हें तेंदुओं की गतिविधियों की रियल-टाइम जानकारी मिलेगी, जिससे वे समय पर सही कदम उठा सकेंगे।
इसके अलावा, कई और कदम भी उठाए जा रहे हैं:
- जागरूकता अभियान: गांवों में विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जाएंगी ताकि लोगों को तेंदुओं से बचने के उपायों के बारे में बताया जा सके।
- पिंजरों की संख्या बढ़ाना: तेंदुओं को पकड़ने के लिए पिंजरों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। अब तक 17 तेंदुओं को पकड़कर जुन्नार के माणिकडोह तेंदुआ बचाव केंद्र में भेजा गया है।
- 24-घंटे कंट्रोल रूम: एक 24-घंटे का कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जहां लोग तेंदुए को देखे जाने की सूचना दे सकते हैं।
प्रशासन की यह नई पहल उम्मीद की एक किरण लेकर आई है। तकनीक और सही योजना के साथ, पुणे में human-leopard conflict Pune की गंभीर समस्या को जल्द ही सुलझाए जाने की उम्मीद है, जिससे इंसान और जानवर दोनों सुरक्षित रह सकेंगे।
