पुणे: पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज रोड पर आयोजित ‘Pune Fountain Pen Show 2025’ में सिर्फ कलमों की खरीद-बिक्री नहीं हो रही, बल्कि यहाँ सालों पुरानी यादें भी जिंदा हो रही हैं। शहर के एक निवासी, भूषण शुक्ला, ने एक ऐसे ही अनुभव को साझा किया जब उनके 25 साल पुराने पार्कर पेन को एक स्थानीय कारीगर ने महज 5 मिनट में ठीक कर दिया, जिसे कंपनी ने भी ठीक करने से मना कर दिया था।
यह तीन दिवसीय प्रदर्शनी (26-28 सितंबर), जिसका आयोजन ‘द इंक एंड पेंस’ द्वारा किया गया है, अपने पांचवें संस्करण में है। यहाँ कलम के शौकीनों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
अहमद खान: कलमों के जादूगर
शो में आए भूषण शुक्ला (@docbhooshan) ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपना अनुभव साझा करते हुए लिखा कि कैसे श्री अहमद खान ने उनके 25 साल पुराने, गिरे हुए पार्कर पेन को खूबसूरती से ठीक कर दिया। उन्होंने लिखा, “आज उन्होंने मेरे पसंदीदा पार्कर पेन کو लगभग 5 मिनट में ठीक कर दिया… अहमद खान ने यह काम खूबसूरती से किया।” यह कहानी उन गुमनाम कारीगरों के हुनर को सामने लाती है जो इस शो की असली जान हैं।
भूषण शुक्ला द्वारा साझा की गई तस्वीर, जिसमें पेन रिपेयर करने वाले श्री अहमद खान दिख रहे हैं।)
Pune Fountain Pen Show: पुणे की विरासत ‘काले पेंस’ की कमी खली
वहीं, शहर के एक और उत्साही, कमांडर विक्रम डब्ल्यू कर्वे (@w_karve), ने एक महत्वपूर्ण बात पर ध्यान दिलाया। उन्होंने ट्वीट किया कि शो में पुणे के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक फाउंटेन पेन ब्रांड “काले पेंस” का कोई स्टॉल नहीं था, जो कई लोगों के लिए आश्चर्य की बात थी।
शो में और क्या है खास? (Highlights from the Exhibition)
यह प्रदर्शनी सिर्फ फाउंटेन पेन के लिए ही समर्पित है, यहाँ कोई बॉलपॉइंट या रोलर पेन नहीं हैं।
- कीमतें: ₹120 के शुरुआती मॉडल से लेकर हाथ से बने लक्जरी संस्करणों के लिए ₹5-6 लाख तक की कलमें यहाँ मौजूद हैं।
- शो-स्टॉपर ‘अभिमन्यु’: एक भारतीय ब्रांड द्वारा बनाया गया “अभिमन्यु” पेन आकर्षण का केंद्र रहा, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह आपको महाभारत के चक्रव्यूह की तरह फंसा लेता है।
- बाजीराव पेशवे को समर्पित पेन: लोटस पेंस ने श्रीमंत थोरले बाजीराव पेशवे को समर्पित एक सीमित संस्करण का अनावरण किया, जिसकी कीमत ₹18,800 है।
सिर्फ एक शौक नहीं, एक बढ़ता समुदाय
‘द इंक एंड पेंस’ की निदेशक, रश्मि पिल्लई, ने कहा, “फाउंटेन पेन सिर्फ लिखने के उपकरण नहीं हैं, बल्कि विचारों के साधन हैं।” यह शो सिर्फ कलमों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि पुणे के बढ़ते पेन प्रेमी समुदाय के लिए एक मिलन स्थल है, जहाँ कार्यशालाएं, पेन रेस्टोरेशन और एक लिखावट प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है।
जैसा कि एक उत्साही ने कहा, “तेजी से टाइप करती दुनिया में, फाउंटेन पेन हमें याद दिलाते हैं कि धीमे होने की अपनी ताकत है।” पुणे फाउंटेन पेन शो ने यह साबित कर दिया है कि कलम की ताकत आज भी जिंदा है।
यह शो पुणे की कला और संस्कृति के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाता है, जैसा कि हमने डॉ. लज्जा ऋषि जैसी प्रेरक हस्तियों की कहानियों में भी देखा है।
