Pune Leopard Attack: जान बचाने को मजबूर किसान, अब गले में पहन रहे कीलों वाले पट्टे

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पुणे: पुणे जिले के ग्रामीण इलाकों में तेंदुए की दहशत इस कदर फैल गई है कि लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए ऐसे तरीके अपनाए हैं जिनके बारे में सुनकर भी डर लगे। शिरूर तहसील में, खेतों में काम करने वाले किसान, खासकर महिलाएं, अब अपनी गर्दन में नुकीली कीलों वाले पट्टे पहनकर काम करने को मजबूर हैं। यह (Pune Leopard Attack) की भयावहता और प्रशासन पर से उठते भरोसे को दिखाता है।

यह दिल दहला देने वाली तस्वीर इंसानी बेबसी की कहानी कहती है, जहां लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए जानवरों की तरह पट्टे पहनने पड़ रहे हैं।

Pune Leopard Attack: क्यों अपनाना पड़ा यह खतरनाक तरीका?

खेती ही इन ग्रामीणों की रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया है, इसलिए वे हर दिन जान जोखिम में डालकर खेतों में जाते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, तेंदुआ हमेशा पीछे से और सीधे गर्दन पर हमला करता है ताकि शिकार को तुरंत काबू में कर सके।

किसानों ने बताया कि उन्होंने यह विचार कुत्तों को तेंदुए से बचाने वाले पट्टों से लिया है। उनका मानना है कि अगर तेंदुआ हमला करता भी है, तो गर्दन में बंधी इन कीलों की वजह से उसकी जान बच सकती है। यह कदम उनके डर और हताशा को दिखाता है और यह एक गंभीर (Pune man-animal conflict) का संकेत है।

प्रशासन की नाकामी और लोगों का गुस्सा

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग और प्रशासन उनकी सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने में नाकाम रहे हैं। हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों और एक 13 साल के लड़के की मौत के बाद लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है। उनका कहना है कि वे कब तक डर के साए में जिएंगे?

लगातार बढ़ते दबाव के बाद, प्रशासन ने कुछ कदम उठाए हैं। (Shirur leopard news) के अनुसार, एक आदमखोर तेंदुए को हाल ही में मार गिराया गया है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली है। सरकार ने बचाव टीमों और उपकरणों के लिए फंड भी मंजूर किया है।

हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि जब तक तेंदुए के आतंक का कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए ऐसे ही दर्दनाक उपाय अपनाते रहने होंगे। यह स्थिति न केवल इंसानों और जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष को दर्शाती है, बल्कि उन सरकारी व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाती है जो समय पर अपने नागरिकों की रक्षा करने में विफल रहती हैं।

Source: https://www.hindustantimes.com/

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