मुख्य बातें:
- रविवार को लगभग २.८४ लाख और शनिवार को करीब २.४९ लाख यात्रियों ने मेट्रो से सफर किया।
- नए खुले मंडई और कसबा पेठ स्टेशनों ने शहर के मध्य क्षेत्रों तक भक्तों की पहुँच को बेहद आसान बनाया।
- त्योहारी भीड़ को देखते हुए ट्रेनों की आवृत्ति हर ३ मिनट की गई और अतिरिक्त फेरे भी चलाए गए।
पुणे: इस गणेशोत्सव, जब पुणे की सड़कें गाड़ियों और भक्तों की भीड़ से जाम थीं, तब पुणे मेट्रो शहर की धड़कन बनकर उभरी। यह सिर्फ एक परिवहन का साधन नहीं, बल्कि लाखों भक्तों के लिए उत्सव के केंद्र तक पहुँचने का एक सुगम, वातानुकूलित और विश्वसनीय माध्यम साबित हुई। सप्ताहांत के दौरान मेट्रो में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ देखी गई, जिसमें रविवार को लगभग २.८४ लाख और शनिवार को करीब २.४९ लाख यात्रियों ने सफर किया। यह आँकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि पुणेवासियों ने ट्रैफिक जाम को अलविदा कहकर मेट्रो को अपना लिया है।
कसबा पेठ मेट्रो स्टेशन का गेट 2 खुला, गणेशोत्सव में भक्तों को राहत
इस साल के उत्सव की सफलता में सबसे बड़ा योगदान नवनिर्मित भूमिगत स्टेशनों, कसबा पेठ और मंडई, का रहा। इन स्टेशनों ने शहर के पारंपरिक हृदय स्थल तक सीधी पहुँच प्रदान की, जहाँ पुणे के सबसे प्रतिष्ठित गणेश मंडल स्थित हैं। महा मेट्रो के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, अकेले रविवार को मंडई स्टेशन पर लगभग ४५,००० यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई, जो सबसे अधिक थी। इसके अलावा, पिंपरी स्टेशन पर लगभग ३३,७०० और स्वारगेट पर २४,८०० से अधिक यात्रियों की आवाजाही दर्ज की गई।
त्योहारी भीड़ की उम्मीद करते हुए, पुणे मेट्रो प्रशासन ने पहले से ही अपनी कमर कस ली थी। यात्रियों की सुविधा के लिए सेवाओं में अभूतपूर्व वृद्धि की गई:
- सामान्यतः छह मिनट के अंतराल पर चलने वाली ट्रेनों को हर तीन मिनट में चलाया गया, ताकि स्टेशनों पर भीड़ जमा न हो।
- रविवार को ५५४ निर्धारित फेरों के अलावा, बढ़ती भीड़ को देखते हुए कई अतिरिक्त फेरे भी चलाए गए।
मेट्रो अधिकारियों ने यात्रियों से किसी एक स्टेशन पर भीड़ न लगाने की भी अपील की। भक्तों को सलाह दी गई कि वे प्रवेश के लिए कसबा पेठ और पीएमसी स्टेशनों का उपयोग करें और वापसी के लिए मंडई स्टेशन को प्राथमिकता दें, ताकि आवाजाही सुचारू बनी रहे।
चंद्रशेखर तांबेकर, अतिरिक्त निदेशक (जनसंपर्क एवं प्रशासन) ने कहा, “मेट्रो ने अतिरिक्त फेरों की व्यवस्था की है और हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि गणेश उत्सव की भीड़ के दौरान यात्रियों का प्रवाह सुगम बना रहे।”
त्योहारी भीड़ का यह सफल प्रबंधन इस बात को रेखांकित करता है कि पुणे मेट्रो अब केवल एक परिवहन प्रणाली नहीं, बल्कि शहर के दैनिक जीवन और सांस्कृतिक उत्सवों का एक अभिन्न अंग बन चुकी है।
