पुणे: गणेश चतुर्थी का पावन पर्व, जब हर ओर उत्सव और नई शुरुआत का उत्साह छाया था, पुणे के लिए एक और बेहद खास सौगात लेकर आया। शहर की धड़कनों में बस चुकी, बेसब्री से प्रतीक्षित हिंजवड़ी-शिवाजीनगर मेट्रो लाइन (लाइन 3) ने इसी शुभ घड़ी में अपना पहला ऐतिहासिक ट्रायल रन सफलतापूर्वक पूरा किया। यह केवल एक ट्रेन का चलना नहीं था; यह पुणे के लिए एक नए युग की शुरुआत का बिगुल था, जब हमारी अपनी “पुणेरी मेट्रो” पहली बार हिंजवड़ी की सीमा से बाहर निकलकर मान डिपो से बालेवाड़ी स्टेडियम तक, शहर के विकास की नई कहानी लिखने को निकली।
पुणे मेट्रो का सबसे लंबा रूट: निगडी से चाकण तक बदलेगी कनेक्टिविटी, जानें पूरा प्लान
पुणे मेट्रो लाइन 3: क्यों है यह इतना खास? एक नागरिक की नज़र से समझते हैं
हम पुणेकर जानते हैं कि ट्रैफिक जाम और लंबी यात्राएँ हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे में, यह मेट्रो लाइन सिर्फ एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि हमारे समय, ऊर्जा और शहर के भविष्य के लिए एक उम्मीद की किरण है। अधिकारियों ने इसे ‘ऐतिहासिक’ बताया है, और क्यों न हो? यह 23.3 किलोमीटर लंबा, 23 स्टेशनों वाला कॉरिडोर है जो हिंजवड़ी के टेक हब को शिवाजीनगर के ऐतिहासिक केंद्र से जोड़ेगा। कल्पना कीजिए, सुबह ऑफिस पहुँचने की हड़बड़ी या शाम को घर लौटने की थकान – यह मेट्रो उसे कितना आसान बना देगी!
तकनीकी कमाल और ‘मेक इन इंडिया’ का गौरव
इस ट्रायल में जिस तीन-कार वाली “मेट्रोपोलिस” ट्रेन का उपयोग किया गया, उसे पुणे मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMRDA) ने गर्व से पेश किया। यह केवल जून में शुरू हुए नियंत्रित ट्रायलों के बाद, पहली बार डिपो से बाहर निकली है। यह ट्रेन 750 V DC थर्ड रेल सिस्टम पर चलती है और इसकी अधिकतम गति 85 किमी/घंटा है, जबकि औसत परिचालन गति 34 किमी/घंटा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह एक बार में 1,000 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है – यानी, एक साथ कई वाहनों के बराबर लोगों को आरामदायक सफर। यह आधुनिकता पुणे की बढ़ती शहरी आबादी के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगी।
‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत, इन मेट्रो ट्रेनसेट का निर्माण आंध्र प्रदेश के श्री सिटी में हो रहा है। यह दर्शाता है कि हमारा देश न केवल बड़ी परियोजनाओं की कल्पना कर सकता है, बल्कि उन्हें अपने दम पर साकार भी कर सकता है। 22 में से चार ट्रेनसेट पहले ही पुणे पहुँच चुके हैं, जो इस सपने को हकीकत में बदलने की गति को दर्शाते हैं।
इस कॉरिडोर का शुरुआती 13 किलोमीटर का हिस्सा, जो हिंजवड़ी और सिविल कोर्ट को जोड़ेगा, सितंबर 2025 तक हम पुणेकरों के लिए खुलने की उम्मीद है। और पूरी लाइन? मार्च 2026 तक हमें पूरी तरह से चालू मेट्रो कॉरिडोर की सौगात मिल सकती है। यह समयसीमा हमारे शहर के लिए एक बेहतर, अधिक जुड़े हुए भविष्य की तस्वीर पेश करती है।
सहयोग की शक्ति: PPP मॉडल और विशेषज्ञ की सराहना
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 2021 में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत एल्सटॉम, सीमेंस और टाटा प्रोजेक्ट्स के एक कंसोर्टियम को सौंपा गया था। यह मॉडल दिखाता है कि कैसे सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें पूरा कर सकते हैं।
अर्बन इंफ्रा ग्रुप की एमडी और सीईओ, श्रीमती ममता शाह ने भी इस उपलब्धि पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने metrorailtoday पर कहा, “पुणेरी मेट्रो की हिंजवड़ी-शिवाजीनगर लाइन का पहला ट्रायल रन शहरी भारत के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है। यह PPP मॉडल, घरेलू विनिर्माण और अगली पीढ़ी की शहरी गतिशीलता की ताकत को दर्शाता है। हर सफल ट्रायल के साथ, पुणे एक अधिक कनेक्टेड, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार परिवहन नेटवर्क की ओर बढ़ रहा है।” उनकी ये बातें केवल व्यावसायिक प्रशंसा नहीं, बल्कि एक विशेषज्ञ की दूरदृष्टि हैं जो इस परियोजना के गहरे प्रभाव को समझती हैं।
यह मेट्रो लाइन सिर्फ आवागमन का साधन नहीं है; यह पुणे की पहचान को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। यह शहर के महत्वपूर्ण सड़क गलियारों पर भीड़ को कम करेगी, पूर्व से पश्चिम तक निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, और हमारे टेक व व्यावसायिक जिलों में रोज़ाना यात्रा करने वालों को बड़ी राहत देगी। सबसे बढ़कर, सिविल कोर्ट इंटरचेंज पर यह अन्य पुणे मेट्रो लाइनों के साथ मिलकर एक ऐसा केंद्रीय गतिशीलता केंद्र बनाएगी जो हमारे शहर के विकास को नई दिशा देगा।
यह ट्रायल रन सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में, यह मेट्रो लाइन पुणे को एक आधुनिक, गतिमान और सचमुच ‘भविष्य के लिए तैयार’ शहर में बदलने की हमारी सामूहिक आकांक्षाओं को साकार करेगी। आइए, हम सब मिलकर इस नई यात्रा का स्वागत करें!
