Pune Municipal Corporation (PMC) चुनाव की तैयारियों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। पीएमसी द्वारा जारी की गई प्रारूप मतदार यादी (Draft Voter List) में भारी गड़बड़ी देखने को मिली है। केवल 5 दिनों के भीतर, चुनाव विभाग को नागरिकों से 419 लिखित हरकती (Objections) प्राप्त हुई हैं। शहर के लाखों मतदाता उस वक्त हैरान रह गए जब उन्हें पता चला कि लिस्ट में उनके नाम या तो गायब हैं, या फिर गलत प्रभाग (Ward) में डाल दिए गए हैं।
Draft Voter List में बड़ी खामियां: 3 लाख से ज्यादा Duplicate Names
पुणे शहर की नई वोटर लिस्ट में लगभग 3 लाख से अधिक दुबार नावे (Duplicate Names) पाए गए हैं। इसका मतलब है कि एक ही व्यक्ति का नाम दो या तीन अलग-अलग जगहों पर दर्ज है। Source: News18
सहकारनगर, पर्वती और बिबवेवाड़ी जैसे इलाकों में नागरिकों ने शिकायत की है कि उनका नाम उनके घर के पास वाले बूथ से हटाकर दूर के किसी और वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। चुनाव आयोग के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि अगर इसे समय रहते ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले महानगरपालिका चुनाव में भारी कन्फ्यूजन हो सकता है।
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नागरिकों की प्रमुख शिकायतें (Key Issues)
पिछले 5 दिनों में दर्ज की गई 419 शिकायतों में मुख्य रूप से ये मुद्दे शामिल हैं:
- वॉर्ड शिफ्टिंग: पूरा परिवार एक ही घर में रहता है, लेकिन पति और पत्नी का नाम अलग-अलग वॉर्ड में है।
- दुबार नाम: एक ही वोटर का नाम लिस्ट में कई बार आया है।
- गायब नाम: कई ऐसे लोग जो सालों से वोट दे रहे हैं, उनका नाम इस नई ड्राफ्ट लिस्ट से नदारद है।
Pune Municipal Corporation: सिर्फ 2 दिन बचे हैं! अपनी हरकत (Objection) कैसे दर्ज करें?
Pune Municipal Corporation ने गलतियों को सुधारने के लिए बहुत कम समय दिया है। यदि आपने अभी तक अपना नाम चेक नहीं किया है, तो तुरंत करें।
- हरकती दर्ज करने की अंतिम तारीख: 27 नवंबर 2025
- फाइनल वोटर लिस्ट: 5 दिसंबर 2025
अगर आपके नाम में कोई गलती है, तो आपको अपने नजदीकी क्षेत्रीय कार्यालय (Ward Office) में जाकर लिखित शिकायत देनी होगी। ऑनलाइन चेक करने के लिए आप www.pmc.gov.in पर जा सकते हैं।
आगे क्या? (What Next)
पुणे में कुल मतदाताओं की संख्या अब 35.51 लाख के पार पहुंच गई है। बानेर-सूस-पाषाण (Baner-Sus-Pashan) सबसे बड़ा वॉर्ड बनकर उभरा है। राजनीतिक पार्टियां जैसे कि एनसीपी (शरद पवार गुट) और कांग्रेस ने भी प्रशासन से मांग की है कि इस लिस्ट को पारदर्शिता के साथ सुधारा जाए।
