पुणे: Kojagiri Pournima के पावन अवसर पर पुणे के नागरिकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पुणे महानगरपालिका (PMC) ने घोषणा की है कि शहर के सभी प्रमुख उद्यान (पार्क) आज रात 12 बजे तक खुले रहेंगे, ताकि परिवार और दोस्त एक साथ इस चांदनी रात का आनंद ले सकें। इस फैसले के बाद, शहर के पार्कों में उत्सव का माहौल देखने को मिल रहा है।
इस घोषणा के जमीनी असर को देखने के लिए पुणे न्यूज़ हब ने शाम को सारसबाग (Saras Baug) का दौरा किया। हमने पाया कि वहां सामान्य से कहीं ज़्यादा भीड़ थी। बच्चे खेल रहे थे, बड़े-बुजुर्ग बातें कर रहे थे, और कई परिवार चादर बिछाकर पारंपरिक ‘मसाला दूध’ का आनंद ले रहे थे।
Kojagiri Pournima की शाम पुणे के सारसबाग में अपने परिवार के साथ समय बिताते लोग।
Kojagiri Pournima: क्या कहते हैं पुणेकर?
PMC के इस फैसले का नागरिकों ने तहे दिल से स्वागत किया है। यह कदम शहरवासियों को अपनी परंपराओं को सामुदायिक रूप से मनाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। “परिवार के साथ समय बिताने का इससे अच्छा मौका नहीं”
हमने निशांत जोशी से बात की, जो अपने पूरे परिवार, बच्चों और माता-पिता के साथ पार्क में आए थे।
उन्होंने खुशी जताते हुए कहा, “यह PMC का बहुत ही अच्छा निर्णय है। घर की बालकनी से चांद देखने और खुले आसमान के नीचे पूरे परिवार के साथ बैठने में बहुत अंतर है। बच्चे भी खुश हैं और बड़ों को भी अच्छा लग रहा है। इससे त्योहार का असली मज़ा आ गया।” यह फैसला सिर्फ एक रात के लिए पार्कों को खुला रखने से कहीं ज़्यादा है।
आधुनिक जीवनशैली में, जहाँ लोग फ्लैटों में सिमट गए हैं, यह कदम सामुदायिक भावना को बढ़ावा देता है। यह लोगों को अपने घरों से बाहर निकलकर, एक साथ मिलकर त्योहार मनाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जो पुणे की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।
देर रात तक पार्कों को सुरक्षित रूप से खुला रखना यह भी दिखाता है कि प्रशासन नागरिकों को सुरक्षित सार्वजनिक स्थान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
PMC का यह छोटा सा कदम पुणे के नागरिकों के लिए एक बड़ा तोहफा है। यह न केवल लोगों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को मनाने का अवसर देता है, बल्कि यह सार्वजनिक स्थानों के सामुदायिक उपयोग को भी बढ़ावा देता है। आज रात, पुणे के पार्क सिर्फ पार्क नहीं, बल्कि उत्सव, समुदाय और चांदनी के मिलन स्थल बन गए हैं, जो ‘स्मार्ट सिटी’ की सच्ची भावना को दर्शाते हैं।
यह उत्सव पुणे की सामुदायिक भावना को दर्शाता है, जैसा कि हमने डांडिया महोत्सव जैसी कहानियों में भी देखा है।
