पुणे: Pune and Pimpri-Chinchwad ने इस साल गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल कायम की है। अपने छठे सफल वर्ष में, ‘Punaravartan’अभियान ने विसर्जन के बाद 67 टन (67,000 किलो) से ज़्यादा शाडू मिट्टी को सफलतापूर्वक रिकवर किया है। यह अभियान, जो अब एक जन आंदोलन बन चुका है, न केवल नदियों को प्रदूषण से बचा रहा है, बल्कि यह रिकवर की गई मिट्टी अब कारीगरों और वास्तुकारों को मुफ्त में दी जाएगी, जिससे एक स्थायी भविष्य का निर्माण हो रहा है।
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The Campaign – अभियान कैसे सफल हुआ?
‘Punaravartan’ एक सामूहिक पहल है, जिसमें PMC, PCMC, कई NGOs, शिक्षण संस्थान और सैकड़ों नागरिक स्वयंसेवक शामिल हैं। इस साल, पुणे में 46 और पिंपरी-चिंचवड़ में 26 स्थानों पर विशेष विसर्जन टैंक बनाए गए थे। गणेश विसर्जन के बाद, इन टैंकों से मिट्टी को निकालकर सुखाया गया।
अभियान को और सफल बनाने के लिए, Poornam Ecovision Foundation ने घर-घर जाकर मिट्टी इकट्ठा करने की सेवा भी शुरू की, जबकि पर्यावरण गतिविधि जैसे संगठनों के स्वयंसेवकों ने 61 से अधिक स्थानों पर कलेक्शन सेंटर स्थापित किए।
‘Punaravartan’ अभियान के तहत एक कलेक्शन सेंटर पर काम करते स्वयंसेवक। फोटो: पुनरावर्तन फाउंडेशन)
The Voice of the Campaign – अभियान की संस्थापक की जुबानी
इस शानदार सफलता पर, पुणे न्यूज़ हब ने ‘Punaravartan‘ Founder, Manisha Sheth, से खास बातचीत की। उन्होंने कहा, ” पुनरावर्तन ने पुणे में अपने छठे वर्ष को पूरा करते हुए 49.5 टन मिट्टी संग्रहित की है। यह कई संगठनों के सहयोग और कुछ सौ स्वयंसेवकों के काम के कारण संभव हो पाया है। पुणे इस प्रयास में देश के बाकी हिस्सों से आगे है, और यह सफलता पूर्वक दिखा रहा है कि कैसे गणेश उत्सव से सामग्री को पुनः प्राप्त और पुनः उपयोग किया जा सकता है।
इस साल संग्रह किए गए आंकड़े अभियान की सफलता की कहानी खुद बयां करते हैं:
- पुणे: कुल 49.5 टन
- सार्वजनिक विसर्जन टैंक: 39.5 टन
- घर पर विसर्जन: 9.4 टन
- घर-घर जाकर संग्रह: 0.6 टन
- पिंपरी–चिंचवड़: कुल 17.7 टन
- कुल (पुणे + PCMC): 67.2 टन
यह अभियान अब महाराष्ट्र के अन्य शहरों तक भी फैल गया है, और ठाणे, मुंबई और महाड को मिलाकर कुल संग्रह 76.1 टन तक पहुँच गया है।
Quality and Reuse – मिट्टी का भविष्य: मूर्ति से मकान तक
यह अभियान सिर्फ मिट्टी इकट्ठा नहीं कर रहा, बल्कि उसे एक नया जीवन दे रहा है।
- सबसे अच्छी मिट्टी: जो मिट्टी घर से मिली, वह सबसे शुद्ध है और सीधे मूर्तिकारों को अगले साल की मूर्तियां बनाने के लिए दी जाएगी, जिससे उनकी लागत कम होगी।
- कम गुणवत्ता वाली मिट्टी: जो मिट्टी सार्वजनिक टैंकों से मिली, उसे अब आर्किटेक्ट्स और शोधकर्ताओं को ग्रीन बिल्डिंग मटेरियल (जैसे दीवार प्लास्टर, ब्लॉक) बनाने के लिए दिया जा रहा है, जो एक क्रांतिकारी कदम है।
निष्कर्ष
साल दर साल ‘Punaravartan’ अभियान का विकास (पुणे में 2022 में 23 टन से 2025 में 49.5 टन तक) यह दिखाता है कि पुणे के नागरिक पर्यावरण के प्रति कितने प्रतिबद्ध हैं। यह अभियान सिर्फ एक पहल नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुका है, जो यह साबित करता है कि परंपरा और पर्यावरण संरक्षण एक साथ संभव हैं। पुणे का यह सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल पूरे देश के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।
अधिक जानने के लिए, www.punaravartan.org पर जाएं।
