Pune Traffic Jam: गणेश चतुर्थी की खरीदारी से पुणे की सड़कें जाम, जानें लेटेस्ट अपडेट

समाचार शेयर करें

पुणे – गणेशोत्सव का उल्लास हवा में घुल चुका था, बाजारों में त्योहार की रौनक देखते ही बन रही थी, लेकिन पुणे की सड़कों पर लगे Pune Traffic Jam के कारण गाड़ियों के हॉर्न और लोगों की बेचैनी का शोर इस खुशी पर भारी पड़ रहा था।  27 अगस्त से शुरू होने वाले गणेश चतुर्थी पर्व से ठीक पहले, आखिरी सप्ताहांत पर शहरवासियों का हुजूम जब खरीदारी के लिए उमड़ा, तो पुणे की धमनियां कही जाने वाली सड़कें थम सी गईं। यह एक ऐसा जाम था, जिसने त्योहारी उत्साह को घंटों की थकावट और झुंझलाहट में बदल दिया।

शनिवार का दिन छुट्टी का था और मौसम भी अनिश्चित। इन दो वजहों ने शहर के ट्रैफिक का पूरा गणित ही बिगाड़ दिया। शहर का दिल कहे जाने वाले लक्ष्मी रोड, तुलसी बाग, कुमठेकर रोड और मंडई जैसे बाजार तो मानो पैदल चलने वालों और वाहनों के एक अंतहीन समुद्र में डूब गए थे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि लोगों को आधा किलोमीटर का सफर तय करने में 20 से 30 मिनट तक का समय लग रहा था। यह नज़ारा किसी उत्सव का कम और धैर्य की परीक्षा का ज़्यादा लग रहा था।

Dagdusheth Ganpati Darshan: आरती टाइमिंग, इतिहास और VIP बुकिंग गाइड

कोथरूड से खरीदारी करने आए अनिकेत जोशी अपनी कार में फंसे हुए थे। उन्होंने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा, “यह तो बस पागलपन है। हम डेक्कन से लक्ष्मी रोड के लिए निकले थे और लगभग दो घंटे से जाम में रेंग रहे हैं। त्योहार का मज़ा तो है, लेकिन इस धुएँ और शोर में फँसकर वह मज़ा भी किरकिरा हो जाता है। बारिश की आशंका से कार लेकर निकले थे, पर अब लग रहा है कि यह सबसे बड़ी गलती थी।”

अनिकेत अकेले नहीं थे; हजारों पुणेकर इसी अनुभव से गुज़र रहे थे। इस महाजाम के पीछे कई वजहें एक साथ काम कर रही थीं। एक तरफ लोग गणेश जी की मूर्तियों, सजावटी सामानों और पूजा सामग्री की आखिरी दौर की खरीदारी कर रहे थे, तो दूसरी तरफ शहर भर में गणेश मंडलों द्वारा बनाए जा रहे पंडालों और स्वागत मेहराबों ने सड़कों को पहले ही सँकरा कर दिया था। रही-सही कसर अवैध डबल-पार्किंग और फुटपाथ पर कब्जा जमाए बैठे फेरीवालों ने पूरी कर दी, जिससे यातायात के लिए बची-खुची जगह भी खत्म हो गई।

इस जाम का जाल केवल मध्य पुणे तक ही सीमित नहीं रहा। इसकी आंच शिवाजी रोड, बाजीराव रोड, फर्ग्यूसन कॉलेज रोड से लेकर सिंहगढ़ रोड, कर्वे रोड और हडपसर जैसे बाहरी इलाकों तक महसूस की गई। हर तरफ गाड़ियाँ कछुए की चाल से सरक रही थीं।

इस स्थिति का अनुमान लगाते हुए पुणे ट्रैफिक पुलिस ने प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल और ट्रैफिक वार्डन तैनात किए थे। हालांकि, वाहनों का सैलाब इतना बड़ा था कि उनकी सारी कोशिशें नाकाफी साबित हो रही थीं। एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हम सुबह से यातायात को सुचारू बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जब हर कोई एक ही समय पर अपनी गाड़ी लेकर सड़क पर आ जाएगा, तो हम भी क्या कर सकते हैं?”

अब जब उत्सव सिर पर है, तो प्रशासन आने वाले 10 दिनों के लिए और बड़ी चुनौतियों की तैयारी कर रहा है। पुणे पुलिस ने यातायात व्यवस्था को लेकर एक विस्तृत योजना बनाई है, जिसमें मध्य पुणे की कई सड़कों को बंद करना और ट्रैफिक को दूसरी दिशाओं में मोड़ना शामिल है।

सप्ताहांत का यह अनुभव पुणे के लिए एक चेतावनी की तरह है। यह शहर के उस वार्षिक विरोधाभास को दर्शाता है, जहाँ भक्ति और उल्लास अपने चरम पर होते हैं, लेकिन नागरिक सुविधाएं और बुनियादी ढांचा उसी चरम पर पहुँचकर चरमरा जाता है। अब देखना यह है कि क्या आने वाले दिनों में प्रशासन की योजनाएं शहर को इस जाम के जाल से मुक्ति दिला पाएंगी, ताकि पुणेकर बिना किसी परेशानी के अपने सबसे बड़े उत्सव का आनंद ले सकें।

Leave a Comment