Pune Vegetable Price Hike: बारिश से 30% महंगी हुई सब्जियां, गृहिणियों का बजट बिगड़ा

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पुणे: पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश का असर अब पुणे के आम नागरिकों की रसोई पर सीधे तौर पर पड़ने लगा है। खेतों में फसलों को हुए भारी नुकसान के कारण शहर की मंडियों में हरी सब्जियों की आवक घट गई है। इस Pune Vegetable Price Hike से धनिया, पालक और टमाटर जैसी रोजमर्रा की सब्जियों की कीमतों में 30% तक का भारी उछाल आया है, और आम आदमी का बजट बिगड़ गया है।

इस महंगाई की जमीनी हकीकत जानने के लिए कोथरुड सब्जी मंडी का दौरा किया और विक्रेताओं के साथ-साथ आम खरीदारों से भी बात की। हमने पाया कि अच्छी गुणवत्ता वाली पत्तेदार सब्जियां कम थीं और उनके दाम काफी बढ़ गए थे।

Pune Vegetable Price Hike: क्या कहते हैं सब्जी विक्रेता?

हमने रामभाऊ, जो पिछले 15 सालों से कोथरुड सब्जी मंडी में अपनी दुकान लगा रहे हैं, से बात की।

उन्होंने हमें बताया, “मंडी से ही माल महंगा और खराब रहा है। बारिश के कारण पूरा धनियापालक गल गया है। जो माल पहले 20 रुपये में खरीदते थे, अब 30-35 रुपये में मिल रहा है। हमें भी मजबूरन दाम बढ़ाना पड़ रहा है। ग्राहक हमसे बहस करते हैं, लेकिन हम क्या करें?

गृहिणियों का दर्द: “बजट संभालना मुश्किल हो गया है”

बढ़ी हुई कीमतों का सबसे ज्यादा असर आम परिवारों पर पड़ रहा है। बाजार में मिलीं शीतल, जो शिवाजीनगर की रहने वाली हैं, ने अपनी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा, “त्योहार का मौसम है और हर चीज महंगी हो गई है। धनिया की एक छोटी गड्डी 40 रुपये की मिल रही है। टमाटर के दाम भी आसमान छू रहे हैं। अब घर का बजट संभालना बहुत मुश्किल हो गया है।

वहीं खरीदारी कर रहीं एक और महिला, नंदिनी देशमुख, ने भी यही बात दोहराई। “पालक, मेथी, सब कुछ महंगा है। दुकानदार कहते हैं कि बारिश की वजह से माल नहीं रहा। हमें उम्मीद है कि बारिश रुकने के बाद कीमतें कम होंगी,” उन्होंने कहा।

क्यों आसमान छू रहे हैं सब्जियों के दाम?

शहर की कृषि उत्पन्न बाजार समिति (APMC) के विशेषज्ञों के अनुसार, इस महंगाई के पीछे कई बड़े कारण हैं।

विक्रेता ने बताया कि पुणे की मंडियों में लगभग 75% सब्जियां पुणे के ग्रामीण इलाकों से आती हैं, जहाँ भारी बारिश हुई है। इसके कारण, मंडियों में सब्जियों की गाड़ियों की आवक सामान्य 1,800 वाहनों से घटकर लगभग 1,450 रह गई है, यानी सप्लाई में सीधी गिरावट आई है।

उन्होंने यह भी बताया कि बारिश के कारण सब्जियों की गुणवत्ता पर भी भारी असर पड़ा है। उन्होंने कहा, “बाजार में रही सब्जियों का एक बड़ा हिस्सा नमी के कारण खराब हो चुका है, इसलिए अच्छी गुणवत्ता वाली सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं।” एक अन्य थोक विक्रेता ने बताया कि पत्तेदार सब्जियों की आवक में 30-40% की गिरावट आई है और जो माल आता भी है, उसमें से 20-30% खराब होने के कारण बर्बाद हो जाता है।

यह महंगाई पुणे में नागरिक समस्याओं की एक और कड़ी है, जो बारिश के बाद और भी बढ़ जाती है, जैसा कि हमारी लल्लानगर रिपोर्ट में भी दिखाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बारिश का दौर थमता नहीं और खेतों से सप्लाई सामान्य नहीं हो जाती, तब तक पुणे के नागरिकों को सब्जियों की महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है। फिलहाल, शीतल और नंदिनी जैसी हजारों गृहिणियों को यही उम्मीद है कि मौसम में सुधार के साथ सब्जियों के दाम भी जल्द ही नीचे आएंगे और उनकी रसोई का बजट पटरी पर लौटेगा।

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