Purandar Airport: 760+ किसानों की सहमति, आकर्षक मुआवज़ा और विरोध की पूरी कहानी

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पुणे, महाराष्ट्र – वर्षों की देरी और अनिश्चितता के बाद, पुरंदर में महत्वाकांक्षी छत्रपति संभाजी राजे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (Purandar Airport) की परियोजना अब ठोस प्रगति के संकेत दे रही है। सरकार की एक नई रणनीति, जिसमें ज़मीन की ज़रूरत को काफी कम कर दिया गया है और एक बेहद आकर्षक मुआवज़ा पैकेज पेश किया गया है, ने बड़ी संख्या में किसानों को सफलतापूर्वक अपने साथ लाने में कामयाबी हासिल की है। हालाँकि, जैसे ही 21-दिवसीय औपचारिक सहमति प्रक्रिया शुरू हुई है, स्थानीय समुदाय का एक मुखर वर्ग अपने विरोध पर दृढ़ है, जिससे पुणे के विमानन भविष्य के लिए एक निर्णायक मोड़ आ गया है।

सहमति प्रक्रिया के पहले ही दिन, एक उत्साहजनक आँकड़े में 760 किसानों ने औपचारिक रूप से अपनी मंज़ूरी दे दी, जिससे परियोजना के लिए लगभग 1,070 एकड़ भूमि समर्पित हो गई। यह शुरुआती सफलता प्रशासन के लिए एक बड़ी जीत है, जो हवाई अड्डे के पहले चरण के लिए आवश्यक 3,000 एकड़ निजी भूमि का अधिग्रहण करने के अपने लक्ष्य पर काम कर रहा है।

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Purandar Airport: गतिरोध तोड़ने के लिए एक नई रणनीति

2016 में स्वीकृत, पुरंदर हवाई अड्डे को पुणे के मौजूदा लोहेगांव हवाई अड्डे पर पड़ रहे गंभीर परिचालन दबाव को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे के रूप में देखा जा रहा है, जो एक वायु सेना अड्डे के रूप में कार्य करता है। हालाँकि, यह परियोजना मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण में चुनौतियों के कारण रुकी हुई थी।

इस गतिरोध को तोड़ने के लिए एक बड़ी रणनीतिक बदलाव के तहत, महाराष्ट्र सरकार ने दो प्रमुख बदलाव किए हैं:

  1. परियोजना का छोटा दायरा: कुल भूमि की आवश्यकता को आधे से भी कम कर दिया गया है, जो शुरुआती 7,000 एकड़ से घटाकर अब 3,000 एकड़ कर दिया गया है। इस कदम का सीधा उद्देश्य विस्थापन को कम करना और हज़ारों किसान परिवारों की चिंताओं को दूर करना है।
  2. बेहतर मुआवज़ा: एक व्यापक और बहु-स्तरीय मुआवज़ा पैकेज पेश किया गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भूमि मालिकों को न केवल मुआवज़ा मिले, बल्कि उन्हें क्षेत्र की भविष्य की समृद्धि में भागीदार भी बनाया जाए।

मुआवज़ा पैकेज में क्या है खास: जानिए विस्तार से

सरकार का प्रस्ताव केवल मौद्रिक भुगतान से कहीं बढ़कर है। इसे प्रभावित लोगों के लिए एक संपूर्ण पुनर्वास और समृद्धि योजना के रूप में डिज़ाइन किया गया है।

  • वित्तीय भुगतान: जो किसान स्वेच्छा से सहमति देते हैं, उन्हें उनकी ज़मीन के लिए रेडी रेकनर (बाज़ार मूल्य) दर का चार गुना सीधा भुगतान मिलेगा।
  • भविष्य में हिस्सेदारी (“एयरोसिटी” मॉडल): भूमि मालिकों को उनकी अधिग्रहित भूमि का 10% हिस्सा नियोजित “एयरोसिटी” (वाणिज्यिक और आवासीय सुविधाओं वाला एक आधुनिक टाउनशिप) के भीतर एक पूर्ण विकसित भूखंड के रूप में वापस दिया जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि इन भूखंडों की कीमत ₹1 करोड़ से ₹2 करोड़ के बीच हो सकती है, जो एक बड़ा मुनाफ़ा प्रदान करेगा।
  • विस्थापित परिवारों के लिए पुनर्वास: अपना घर खोने वाले प्रत्येक परिवार को नई एयरोसिटी में 250 वर्ग मीटर का आवासीय भूखंड आवंटित किया जाएगा, ताकि वे स्थानीय समुदाय का हिस्सा बने रहें।
  • भूमिहीनों के लिए सुरक्षा: इस योजना में भूमिहीन खेतिहर मज़दूरों के लिए भी प्रावधान हैं, जिन्हें 25 महीने की न्यूनतम मज़दूरी के बराबर मुआवज़ा मिलेगा, और छोटे भूमिधारकों को 18 महीने की न्यूनतम मज़दूरी मिलेगी।
  • स्थानीय रोज़गार में प्राथमिकता: सरकार ने आश्वासन दिया है कि हवाई अड्डा चालू होने पर उपलब्ध होने वाली नौकरियों में परियोजना-प्रभावित परिवारों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी।

एक कहानी, दो आवाज़ें: कहीं सहमति, कहीं विरोध

इस आशाजनक शुरुआत के बावजूद, परियोजना का रास्ता पूरी तरह से साफ़ नहीं है। “विमानतल विरोधी समिति” ने घोषणा की है कि उनका आंदोलन जारी रहेगा। वे सरकार के वादों पर संदेह कर रहे हैं और किसी भी आगे की चर्चा से पहले परियोजना के घटे हुए आकार की पुष्टि करने वाली एक आधिकारिक अधिसूचना की मांग कर रहे हैं।

इस विरोध का एक सशक्त प्रदर्शन करते हुए, पारगांव ग्राम सभा ने परियोजना को अस्वीकार करते हुए एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया, और कहा कि उनकी पूरी सहमति के बिना कोई भी अधिग्रहण उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा। इन किसानों के लिए, यह मुद्दा सिर्फ पैसे का नहीं है, बल्कि अपनी पुश्तैनी ज़मीन और जीवन शैली को बचाने का है।

हालाँकि, शीर्ष सरकारी अधिकारी आश्वस्त हैं। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने परियोजना के प्रति राज्य की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया है, उचित मुआवज़े का आश्वासन दिया है और कहा है कि जो लोग अभी भी विरोध में हैं, उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए बातचीत जारी है। केंद्र सरकार भी हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है, केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने पुष्टि की है कि जैसे ही राज्य भूमि अधिग्रहण पूरा कर लेगा, केंद्र की भूमिका शुरू हो जाएगी।

जैसे-जैसे 21-दिवसीय सहमति प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, सभी की निगाहें पुरंदर पर टिकी हैं। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि क्या सरकार की संशोधित रणनीति एक आम सहमति बनाने और इस बहुप्रतीक्षित, महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा परियोजना को अंततः धरातल पर उतारने के लिए पर्याप्त है।

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