पुणे और कोंकण क्षेत्र के जंगलों के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है। एक बाघिन, जिसे बड़े प्यार से ‘सह्याद्री की रानी’ कहा जा रहा है, को आज सफलतापूर्वक Chandoli National Park के खुले जंगलों में छोड़ दिया गया है। यह Sahyadri Tiger Reserve को फिर से बाघों से आबाद करने के मिशन में एक बहुत बड़ी कामयाबी है।
यह सिर्फ एक जानवर की आज़ादी नहीं है, बल्कि यह एक पूरे जंगल के भविष्य को बचाने की एक खूबसूरत कहानी है।
नए घर में घुलने-मिलने की तैयारी
इस बाघिन को सीधे जंगल में नहीं छोड़ा गया। उसे पहले एक बहुत बड़े, ख़ास तौर पर बनाए गए बाड़े में रखा गया था। यहाँ Wildlife Institute of India(WII) के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने उस पर गहरी नज़र रखी। उन्होंने यह समझा कि:
- वह कैसे घूम रही है?
- उसका व्यवहार कैसा है?
- वह शिकार करने में कितनी दिलचस्पी ले रही है?
- क्या वह नए माहौल में आरामदायक महसूस कर रही है?
सब कुछ वैज्ञानिक तरीके से जांचने के बाद, जब विशेषज्ञों को पूरा यकीन हो गया कि वह पूरी तरह से तैयार है, तब उसे रिलीज़ करने का फैसला लिया गया। बाड़े का दरवाज़ा 18 तारीख को ही खोल दिया गया था, लेकिन इस ‘रानी’ ने बाहर निकलने में अपना पूरा समय लिया और आखिरकार 20 तारीख की सुबह करीब 8:15 बजे वह पूरे शान से बाहर निकली।
उस पर 24 घंटे नज़र कैसे रखी जाएगी?
यह tigress release बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से किया गया है। बाघिन की सुरक्षा और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है:
- रेडियो कॉलर: उसके गले में एक सैटेलाइट रेडियो कॉलर लगाया गया है। यह एक GPS डिवाइस की तरह काम करता है, जिससे टीम को हर पल उसकी लोकेशन का पता चलता रहेगा।
- ग्राउंड टीमें: जंगल में अलग-अलग जगहों पर वन विभाग और WII की टीमें तैनात की गई हैं, जो पैदल गश्त करके भी उस पर नज़र रखेंगी।
इन टीमों का मुख्य काम यह देखना है कि बाघिन नए घर में कैसे रह रही है, कहाँ घूम रही है, और क्या वह सफलतापूर्वक शिकार कर पा रही है।
Sahyadri Tiger Reserve: विशेषज्ञों ने क्या कहा?
सह्याद्री टाइगर रिज़र्व के फील्ड डायरेक्टर तुषार चव्हाण (IFS) ने बताया,
“सबसे पहले, ‘ऑपरेशन तारा’ के तहत, हम ताडोबा से एक बाघिन लाए, जिसे STR 04 नाम दिया गया है। वह यहाँ वंश शुरू करने वाली पहली मादा होगी। इसीलिए हमने उसे ‘सह्याद्री की रानी’ कहा है। वह भविष्य में सह्याद्री टाइगर रिज़र्व में होने वाले शावकों की माँ बनेगी। यह ऑपरेशन इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे पास टाइगर रिज़र्व में तीन नर बाघ थे, लेकिन हमारे पास कोई मादा नहीं थी। वह इस इलाके की पहली मादा है और बहुत स्वस्थ है।
बाघिन ने बाड़े के अंदर रहते हुए नए माहौल में ढलने के बेहतरीन संकेत दिए। वह पूरी तरह से स्वस्थ है और चांदोली के जंगलों में रहने के लिए तैयार है। हमारी टीम 24×7 निगरानी के लिए तैनात है और हम उसे परेशान किए बिना, सुरक्षित दूरी से उस पर नज़र रखेंगे ताकि वह अपने पहले शावकों को जन्म दे सके।”
महाराष्ट्र के मुख्य वन्यजीव वार्डन एम. एस. रेड्डी (IFS) ने कहा,
“यह पहल Maharashtra wildlife conservation के लिए हमारे वैज्ञानिक और व्यवस्थित दृष्टिकोण को दर्शाती है। बाघिन ने यहाँ के माहौल को अच्छी तरह से अपना लिया है। हमारी विशेषज्ञ टीमें उसकी लगातार निगरानी करेंगी, जिससे सह्याद्री में बाघों की एक स्वस्थ आबादी को फिर से स्थापित करने में मदद मिलेगी।”
यह मिशन सिर्फ एक बाघ को बचाने के बारे में नहीं है। यह हमारे जंगलों के संतुलन को बनाए रखने के बारे में है। एक बाघ जंगल की सेहत का प्रतीक होता है। ‘सह्याद्री की रानी’ की वापसी यह उम्मीद जगाती है कि सही वैज्ञानिक तरीकों और समर्पण के साथ, हम अपनी प्रकृति को आने वाली पीढ़ियों के लिए फिर से समृद्ध और सुरक्षित बना सकते हैं।
