Students gather at Savitribai Phule Pune University to raise concerns over the NEET-UG 2026 paper leak, demanding greater transparency, accountability, and trust in the examination process.
पुणे | जून 2026
एक परीक्षा, लाखों सपने और फिर अचानक सब कुछ अनिश्चित।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर जारी विवाद अब सड़कों तक पहुंच गया है। पुणे में Gen-Z युवाओं के समूह “Cockroach Janta Party (CJP)” ने कल शाम 4 बजे सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय परिसर स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर प्रतिमा के पास शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है।
यह प्रदर्शन केवल एक परीक्षा के खिलाफ नाराजगी नहीं है। इसके पीछे लाखों छात्रों की वह चिंता है, जो पिछले कुछ वर्षों में लगातार सामने आने वाले पेपर लीक, परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों और बढ़ते मानसिक दबाव से जुड़ी हुई है।
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आखिर क्यों हो रहा है विरोध?
NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी। लेकिन बाद में कथित पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रश्नपत्र कथित रूप से WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा किया गया था। मामले की जांच अब CBI कर रही है और राजस्थान सहित कई राज्यों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं। पुनर्परीक्षा 21 जून को प्रस्तावित है।
हालांकि लाखों छात्रों के लिए यह फैसला राहत से ज्यादा तनाव लेकर आया।
कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने महीनों तक तैयारी की थी और परीक्षा रद्द होने से उनका मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक दबाव बढ़ गया है।
छात्रों का गुस्सा आखिर क्यों बढ़ रहा है?
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की सबसे बड़ी ताकत उस पर छात्रों का भरोसा होता है।
इस साल NEET से जुड़े तनाव को लेकर चिंताएं और गंभीर हुई हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और छात्र संगठनों के दावों के अनुसार, NEET तैयारी और परीक्षा दबाव से जुड़े कई दुखद आत्महत्या के मामले भी सामने आए हैं। हालांकि प्रत्येक मामले के कारण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज हुई है।
कोटा, पुणे, दिल्ली और पटना जैसे कोचिंग हब में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल देखा जा रहा है।
क्या है Cockroach Janta Party की मांग?
समूह के संस्थापक अभिजीत डिपके का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा।
प्रदर्शनकारियों से किताबें, फूल और संविधान के मूल्यों के साथ आने की अपील की गई है। समूह शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है।
संगठन ने यह भी संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में दिल्ली में बड़े स्तर पर धरना प्रदर्शन किया जा सकता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
शिक्षा नीति विशेषज्ञों का मानना है कि केवल दोषियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होगी।
उनके अनुसार परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, प्रश्नपत्र वितरण प्रणाली और साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।
कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि परीक्षा सुधारों के साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
आगे क्या?
अब सभी की नजर दो महत्वपूर्ण घटनाओं पर है—पुणे में होने वाले प्रदर्शन और 21 जून को प्रस्तावित NEET पुनर्परीक्षा पर।
यदि जांच में और तथ्य सामने आते हैं, तो परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की मांग और तेज हो सकती है।
फिलहाल एक बात साफ है। यह विवाद केवल एक परीक्षा का नहीं रह गया है। यह देश के लाखों छात्रों के भरोसे, भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार, एजेंसियों और छात्रों के बीच संवाद किस दिशा में जाता है, यही इस पूरे मामले की अगली कहानी तय करेगा।
