पुणे: आज पुणे का तिलक स्मारक मंदिर उस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना, जब दो युगों की परिवर्तनकारी सोच एक मंच पर सम्मानित हुई। सड़कों और एक्सप्रेसवे के जरिए आधुनिक भारत की तस्वीर बदलने वाले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को आज यहाँ प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2025 से नवाजा गया। लोकमान्य तिलक स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. रोहित तिलक के हाथों यह सम्मान ग्रहण करते हुए गडकरी के चेहरे पर वही दृढ़ता दिखी, जो उनके काम में झलकती है।
यह केवल एक पुरस्कार समारोह नहीं था, बल्कि उस दूरदर्शी नेतृत्व का सम्मान था, जिसकी गूंज हमें लोकमान्य तिलक के उन क्रांतिकारी विचारों में सुनाई देती है, जिन्होंने कभी पूरे भारत को झकझोर दिया था।
जैसे तिलक ने जगाई ‘स्वराज’ की अलख, वैसे गडकरी गढ़ रहे ‘विकास’ का भारत
एक दौर था जब 1857 के बाद देश निराशा के अंधकार में डूबा था, तब लोकमान्य तिलक की एक हुंकार—“स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा!”—ने पूरे राष्ट्र में चेतना की ज्वाला फूंक दी थी। उन्होंने संस्कृति को स्वतंत्रता संग्राम की ढाल बनाकर गुलामी की जंजीरों पर प्रहार किया।
आज, उसी परिवर्तनकारी भावना की मशाल आधुनिक भारत में नितिन गडकरी थामे हुए हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि उनका रणक्षेत्र देश की सड़कें, खेत और ऊर्जा नीतियां हैं। लोकमान्य ने जहां राजनीतिक स्वतंत्रता की नींव रखी, वहीं गडकरी आर्थिक आत्मनिर्भरता और विकास का ढांचा खड़ा कर रहे हैं।
सिर्फ मंत्री नहीं, भविष्य के ‘शिल्पकार’
नितिन गडकरी का नाम आते ही मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से लेकर देश के कोने-कोने को जोड़ते राष्ट्रीय राजमार्गों का जाल आंखों के सामने आ जाता है। लेकिन उनका काम सिर्फ कंक्रीट और तारकोल तक सीमित नहीं है। वह उन चंद नेताओं में से हैं, जिन्होंने भविष्य को समय से पहले भांप लिया।
- कल की ऊर्जा, आज की नीति: जब देश में इलेक्ट्रिक वाहनों और एथेनॉल पर चर्चा शुरू भी नहीं हुई थी, तब गडकरी इसके सबसे बड़े पैरोकार बनकर उभरे। आज भारत की ऊर्जा नीति में जो क्रांतिकारी बदलाव दिख रहा है, उसकी नींव गडकरी ने ही रखी थी।
- खेत से लेकर विज्ञान तक: उनका काम सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। कृषि क्षेत्र में शोध-आधारित और तकनीक-युक्त दृष्टिकोण अपनाकर उन्होंने किसानों को सशक्त बनाने का काम किया है, जो ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रहा है।
यह पुरस्कार इस बात की गवाही है कि लोकमान्य तिलक की तरह ही नितिन गडकरी भी लीक से हटकर सोचने और उसे धरातल पर उतारने का साहस रखते हैं।
यह सम्मान सिर्फ सड़कों और पुलों के निर्माण का नहीं, बल्कि उस जज़्बे का है जो लाखों जिंदगियों में बदलाव ला रहा है और एक आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव रख रहा है। नितिन गडकरी को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई।
